पिछले कुछ दिनों से चांदी के दाम में लगातार गिरावट देखी जा रही है। अचानक आई इस गिरावट ने निवेशकों और आम खरीदारों दोनों को सोच में डाल दिया है कि आखिर चांदी सस्ती क्यों हो रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर
चांदी की कीमतें सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय होती हैं। डॉलर मजबूत होने और विदेशी बाजारों में दबाव बढ़ने से चांदी के भाव नीचे आए हैं।
डॉलर की मजबूती
जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं पर असर पड़ता है। इस समय डॉलर में मजबूती की वजह से चांदी की मांग कमजोर हुई है।
औद्योगिक मांग में कमी
चांदी का इस्तेमाल:
- इलेक्ट्रॉनिक्स
- सोलर पैनल
- ऑटो सेक्टर
में होता है। इन सेक्टरों से मांग थोड़ी घटी है, जिसका सीधा असर कीमत पर पड़ा है।
मुनाफावसूली भी कारण
जब चांदी ऊंचे स्तर पर पहुंचती है, तो बड़े निवेशक मुनाफा निकालते हैं। इसी मुनाफावसूली के चलते बाजार में बिकवाली बढ़ी और दाम नीचे आए।
ब्याज दरों की चिंता
अमेरिका समेत कई देशों में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऊंची ब्याज दरें निवेशकों को धातुओं से दूर कर देती हैं, जिससे चांदी पर दबाव बनता है।
भारत में मांग कमजोर
शादी-त्योहार का सीजन खत्म होने के बाद भारत में चांदी की खरीद थोड़ी सुस्त पड़ी है। कम मांग की वजह से स्थानीय बाजार में भी दाम घटे हैं।
आगे क्या रहेगा हाल
बाजार जानकारों का मानना है कि:
- अगर डॉलर कमजोर पड़ा
- औद्योगिक मांग सुधरी
- अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ा
तो चांदी में फिर से तेजी आ सकती है। फिलहाल उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
निवेशकों के लिए सलाह
जल्दबाजी में फैसला न लें। अगर आप लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो गिरावट को मौका भी माना जा सकता है। लेकिन निवेश से पहले बाजार की स्थिति जरूर समझें।