आज के समय में सेकेंड-हैंड सामान खरीदना और बेचना आम बात हो गई है। लेकिन यदि सावधानी न बरती जाए तो बाद में बड़ी आर्थिक और कानूनी परेशानी हो सकती है। इसलिए ग्राहक और दुकानदार दोनों को नीचे दी गई बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
1. सबसे पहले जांचें – सामान फाइनेंस पर तो नहीं है
यह सबसे जरूरी बात है। कहीं ऐसा न हो कि बाइक, कार या मोबाइल अभी भी बैंक या फाइनेंस कंपनी के लोन पर हो। यदि लोन बकाया है तो कंपनी वाहन जब्त कर सकती है या मोबाइल लॉक हो सकता है।
हमेशा एनओसी (No Objection Certificate) या लोन क्लोजर प्रमाण अवश्य देखें।
2. मूल बिल या चालान अवश्य देखें
पुराना बिल यह साबित करता है कि सामान चोरी का नहीं है।
3. पहचान पत्र की प्रति सुरक्षित रखें
दोनों पक्ष एक-दूसरे का पहचान पत्र रिकॉर्ड में रखें।
4. सीरियल नंबर या आईएमईआई जांचें
मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक वस्तु में नंबर मिलान करना जरूरी है।
5. वाहन का स्वामित्व सत्यापन करें
बाइक या कार खरीदते समय पंजीकरण प्रमाणपत्र और स्वामित्व की स्थिति अवश्य जांचें।
6. लिखित समझौता अवश्य करें
साधारण कागज पर भी वस्तु का विवरण, कीमत और हस्ताक्षर होने चाहिए।
7. भुगतान का प्रमाण रखें
नकद हो या ऑनलाइन, लेन-देन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
8. वस्तु की स्थिति स्पष्ट लिखें
खराबी, मरम्मत या किसी भी दोष का पहले से उल्लेख करें।
9. वारंटी की जानकारी लें
यदि वारंटी बची है तो उसका विवरण स्पष्ट करें।
10. सभी सहायक सामान जांचें
चार्जर, चाबी, रिमोट या अन्य दस्तावेज पूरे मिलें।
11. खरीद से पहले परीक्षण करें
सामान को पूरी तरह चलाकर या जांचकर ही भुगतान करें।
12. वापसी की शर्त स्पष्ट करें
समस्या आने पर वापसी या बदलाव की शर्त पहले तय करें।
13. बाजार मूल्य की तुलना करें
सही कीमत का अंदाजा लगाकर ही सौदा करें।
14. नकली या डुप्लीकेट सामान से बचें
बहुत कम कीमत मिलने पर सावधानी बरतें।
15. बातचीत और दस्तावेज सुरक्षित रखें
सभी संदेश, कॉल या कागजी रिकॉर्ड भविष्य के लिए संभालकर रखें।
निष्कर्ष
सेकेंड-हैंड सामान खरीदते समय सबसे बड़ी सावधानी यही है कि वह किसी फाइनेंस या बकाया लोन में न फंसा हो। थोड़ी सी जांच-पड़ताल आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है। समझदारी से किया गया सौदा ही सुरक्षित सौदा होता है।
सेकेंड-हैंड सामान लेते समय और किन बातों पर ध्यान दें
1. सामान चोरी या गुमशुदा तो नहीं
संभव हो तो स्थानीय स्तर पर पुष्टि करें कि सामान चोरी की रिपोर्ट में दर्ज तो नहीं है।
2. ब्लैकलिस्ट स्थिति जांचें
मोबाइल का आईएमईआई ब्लैकलिस्ट तो नहीं है, वाहन पर कोई कानूनी रोक तो नहीं है।
3. कोई कानूनी मामला लंबित तो नहीं
वाहन पर चालान, केस या टैक्स बकाया तो नहीं है।
4. गिरवी रखा हुआ सामान न हो
कई लोग सामान किसी के पास गिरवी रख देते हैं। ऐसे सामान को खरीदने से विवाद हो सकता है।
5. सर्विस इतिहास देखें
बाइक, कार या मशीन का सर्विस रिकॉर्ड देखने से असली स्थिति का पता चलता है।
6. पार्ट्स बदले गए हैं या नहीं
कहीं इंजन, बैटरी, स्क्रीन या अन्य महत्वपूर्ण पार्ट्स बदले तो नहीं गए।
7. पानी या आग से नुकसान
इलेक्ट्रॉनिक सामान में वॉटर डैमेज या जलने के निशान जांचें।
8. कागजात पूरे और असली हों
वाहन के मामले में बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र, टैक्स रसीद आदि वैध हों।
9. डुप्लीकेट चाबी या एक्सेस
कार या बाइक में कितनी चाबियाँ हैं, यह स्पष्ट करें। मोबाइल में सभी खाते हटवाएं।
10. फैक्ट्री रीसेट कराएं
मोबाइल या लैपटॉप लेते समय पुराना डेटा पूरी तरह हटवाएं।
11. लॉक या पासवर्ड समस्या
मोबाइल या लैपटॉप किसी कंपनी लॉक, आईडी लॉक या स्क्रीन लॉक में तो नहीं है।
12. बैटरी और इंजन की स्थिति
बाइक, कार और इलेक्ट्रॉनिक वस्तु में बैटरी या इंजन की वास्तविक स्थिति जांचें।
13. नकली दस्तावेज से सावधान
दस्तावेज की कॉपी और मूल में मिलान करें।
14. जल्दबाजी में निर्णय न लें
बहुत सस्ता या तुरंत निर्णय लेने का दबाव हो तो सावधान रहें।
15. विश्वसनीय स्थान पर ही सौदा करें
सुनसान जगह की बजाय सुरक्षित और सार्वजनिक स्थान पर लेन-देन करें।
अंतिम सलाह
सेकेंड-हैंड सामान खरीदते समय हमेशा यह सोचें कि “अगर बाद में समस्या आई तो क्या मेरे पास सबूत है?”
जितनी ज्यादा जांच और लिखित प्रमाण होंगे, उतना ही सुरक्षित सौदा होगा।
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