High-Risk Intraday Trading Strategy: How to get 5% daily returns in Indian Stock Market

हाई-रिस्क इंट्राडे ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी: भारतीय शेयर बाजार में 5% दैनिक रिटर्न पाने का तरीका

इंट्राडे ट्रेडिंग से बड़े मुनाफे कमाए जा सकते हैं, लेकिन यह एक हाई-रिस्क स्ट्रैटेजी है, खासकर अगर आप रोजाना 5% रिटर्न का लक्ष्य रखते हैं। यह स्ट्रैटेजी अनुभवी ट्रेडर्स के लिए है जो मार्केट की अस्थिरता और रिस्क मैनेजमेंट समझते हैं। ₹1 लाख की कैपिटल के साथ, हम EMA, VWAP, RSI और वॉल्यूम ब्रेकआउट जैसे टेक्निकल इंडिकेटर्स का उपयोग करके एक एग्रेसिव इंट्राडे प्लान बनाएंगे।

चेतावनी: यह स्ट्रैटेजी अत्यधिक जोखिम भरी है और शुरुआती लोगों के लिए नहीं है। ट्रेडिंग में कोई गारंटीड प्रॉफिट नहीं होता—नुकसान की संभावना हमेशा रहती है। हमेशा सख्त रिस्क मैनेजमेंट के साथ ट्रेड करें।


स्ट्रैटेजी का ओवरव्यू

  • कैपिटल: ₹1 लाख
  • दैनिक टारगेट: 5% (₹5,000)
  • प्रति ट्रेड रिस्क: कैपिटल का 1-2% (₹1,000-₹2,000)
  • होल्डिंग टाइम: कुछ मिनट से 2 घंटे तक
  • ट्रेडिंग का सबसे अच्छा समय: सुबह के पहले 1-2 घंटे (9:15 AM – 11:30 AM) जब मार्केट में सबसे ज्यादा वॉलैटिलिटी और लिक्विडिटी होती है।

इस्तेमाल किए जाने वाले टेक्निकल इंडिकेटर्स

1. एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) – ट्रेंड की पुष्टि

  • 9 EMA & 21 EMA शॉर्ट-टर्म ट्रेंड दिखाते हैं।
  • खरीद का सिग्नल: प्राइस दोनों EMAs से ऊपर + EMAs ऊपर की ओर झुकाव।
  • बेचने का सिग्नल: प्राइस दोनों EMAs से नीचे + EMAs नीचे की ओर झुकाव।

2. वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) – एंट्री और एग्जिट

  • VWAP सपोर्ट के पास खरीदारी + वॉल्यूम बढ़ रहा हो।
  • VWAP रेजिस्टेंस के पास बिकवाली + वॉल्यूम कम हो रहा हो।

3. रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) – ओवरबॉट/ओवरसोल्ड जोन

  • RSI (14-पीरियड) का उपयोग ओवरएक्सटेंडेड मूव से बचने के लिए।
  • खरीदें: RSI > 30 (ओवरसोल्ड बाउंस) + प्राइस सपोर्ट के पास।
  • बेचें: RSI < 70 (ओवरबॉट रिजेक्शन) + प्राइस रेजिस्टेंस के पास।

4. वॉल्यूम ब्रेकआउट – मजबूती की पुष्टि

  • वॉल्यूम, 20-दिन के औसत से 1.5x ज्यादा होना चाहिए।
  • हाई वॉल्यूम के साथ ब्रेकआउट सफलता की संभावना बढ़ाता है।

स्टॉक सिलेक्शन के नियम

  • लिक्विड स्टॉक्स: ज्यादा वॉल्यूम वाले (जैसे रिलायंस, HDFC बैंक, टाटा स्टील, ICICI बैंक)।
  • प्राइस रेंज: ₹100-₹500 (क्विक स्काल्पिंग के लिए उपयुक्त)।
  • बीटा > 1: ज्यादा वॉलैटाइल स्टॉक्स तेजी से चलते हैं।
  • सेक्टर मोमेंटम: जिस सेक्टर में उस दिन सबसे ज्यादा तेजी हो, उसके स्टॉक्स चुनें।

एंट्री और एग्जिट के नियम

खरीदारी (लॉन्ग ट्रेड)

  1. प्राइस 9 & 21 EMA से ऊपर, EMAs ऊपर की ओर।
  2. RSI (14) 40-60 के बीच (ब्रेकआउट से पहले न्यूट्रल जोन)।
  3. वॉल्यूम सर्ज (औसत से 1.5x ज्यादा) जब प्राइस रेजिस्टेंस तोड़े।
  4. एंट्री: VWAP या EMA सपोर्ट पर पुलबैक होने पर।
  5. स्टॉप लॉस: एंट्री से 1-2% नीचे या स्विंग लो।
  6. टारगेट: 3-5% प्रॉफिट (रिस्क-रिवार्ड 1:3 या बेहतर)।

बिकवाली (शॉर्ट ट्रेड)

  1. प्राइस 9 & 21 EMA से नीचे, EMAs नीचे की ओर।
  2. RSI (14) 70 से ऊपर (ओवरबॉट रिजेक्शन)।
  3. वॉल्यूम स्पाइक जब प्राइस सपोर्ट तोड़े।
  4. एंट्री: VWAP रेजिस्टेंस की ओर बाउंस होने पर।
  5. स्टॉप लॉस: एंट्री से 1-2% ऊपर या स्विंग हाई।
  6. टारगेट: 3-5% डाउनसाइड (रिस्क-रिवार्ड 1:3 या बेहतर)।

रिस्क मैनेजमेंट के नियम

  • प्रति ट्रेड मैक्स लॉस: कैपिटल का 1-2% (₹1,000-₹2,000)।
  • दैनिक मैक्स लॉस: 5% (₹5,000) – लॉस होने पर ट्रेडिंग बंद करें।
  • रिवेंज ट्रेडिंग से बचें – प्लान पर टिके रहें।
  • ओवर-लेवरेजिंग न करें – केवल 5-10x मार्जिन का उपयोग करें।
  • रोजाना सिर्फ 2-3 हाई-कॉन्विक्शन ट्रेड्स करें।

यह स्ट्रैटेजी इतनी रिस्की क्यों है?

  • 5% दैनिक टारगेट बहुत एग्रेसिव है – मार्केट हमेशा एक जैसा नहीं चलता।
  • फॉल्स ब्रेकआउट से तेजी से नुकसान हो सकता है।
  • इमोशनल ट्रेडिंग रिस्क को बढ़ा देती है।
  • ब्रोकरेज और टैक्स छोटे मुनाफे को खा जाते हैं।

अंतिम सुझाव

यह हाई-रिस्क इंट्राडे स्ट्रैटेजी अगर बिल्कुल सही तरीके से इस्तेमाल की जाए तो 5% दैनिक रिटर्न दे सकती है, लेकिन नुकसान भी उतना ही बड़ा हो सकता है। सफलता के लिए अनुशासन, सख्त रिस्क मैनेजमेंट और रीयल-टाइम डिसीजन जरूरी है।

कभी भी उतना पैसा न लगाएं जिसका नुकसान आप बर्दाश्त नहीं कर सकते। इस स्ट्रैटेजी को डेमो अकाउंट में टेस्ट करने के बाद ही रियल कैपिटल लगाएं।

क्या आप इस स्ट्रैटेजी को आजमाएंगे? कमेंट में बताएं!


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मेटा डिस्क्रिप्शन:
भारतीय शेयर बाजार में 5% दैनिक रिटर्न पाने के लिए इस हाई-रिस्क इंट्राडे स्ट्रैटेजी को जानें। EMA, VWAP, RSI और वॉल्यूम ब्रेकआउट का उपयोग करके ट्रेड करें। सख्त रिस्क मैनेजमेंट जरूरी है!

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