सरकार हजारों करोड़ खर्च करती है, फिर भी जनता तक बुनियादी सुविधाएँ क्यों नहीं पहुँचतीं?

हर साल भारत सरकार सड़क, बिजली, पानी, अस्पताल और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं पर लाखों करोड़ रुपये खर्च करती है। फिर भी, आम आदमी को इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता। गड्ढे भरी सड़कें, 10-12 घंटे की बिजली कटौती, गंदा पानी, और टूटे स्कूल-अस्पताल आज भी हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं।

सवाल यह है: अगर सरकार इतना पैसा खर्च कर रही है, तो ज़मीनी हकीकत में सुधार क्यों नहीं हो रहा? कहाँ गायब हो जाते हैं ये करोड़ों रुपये? आइए, इसकी पूरी कहानी समझते हैं।


1. सरकार कितना पैसा खर्च करती है? (Budget & Schemes)

भारत सरकार हर साल बजट में इन मूलभूत सुविधाओं के लिए भारी-भरकम रकम आवंटित करती है। कुछ प्रमुख योजनाएँ और उन पर खर्च:

🚧 सड़क निर्माण

💡 बिजली व्यवस्था

  • 2023-24 बजट: ₹20,671 करोड़ (विद्युत मंत्रालय)
  • योजनाएँ: SAUBHAGYA (सभी को बिजली), UDAY (डिस्कॉम सुधार)

🚰 जल आपूर्ति

  • 2023-24 बजट: ₹60,000 करोड़ (जल शक्ति मंत्रालय)
  • योजनाएँ: Jal Jeevan Mission (हर घर नल कनेक्शन)

🏥 सरकारी अस्पताल

  • 2023-24 बजट: ₹86,175 करोड़ (स्वास्थ्य मंत्रालय)
  • योजनाएँ: Ayushman Bharat, NHM

📚 सरकारी स्कूल

  • 2023-24 बजट: ₹1.12 लाख करोड़ (शिक्षा मंत्रालय)
  • योजनाएँ: Samagra Shiksha, Mid-Day Meal

लेकिन, इतना पैसा खर्च होने के बाद भी हालात क्यों नहीं सुधरते?


2. ज़मीनी स्तर पर बदहाली के 5 बड़े कारण

🔴 1. भ्रष्टाचार और टेंडर घोटाले

  • कॉन्ट्रैक्टर्स और अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी बिल बनाकर पैसा हड़प लिया जाता है।
  • निम्न गुणवत्ता की सामग्री इस्तेमाल की जाती है, जिससे सड़कें 6 महीने में ही खराब हो जाती हैं।

🔴 2. लोकल निकायों की लापरवाही

  • नगर निगम, पंचायत और जिला प्रशासन काम की निगरानी नहीं करते।
  • शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

🔴 3. जनप्रतिनिधियों (MLA/MP) की निष्क्रियता

  • चुनाव के बाद जनता से मिलना बंद कर देते हैं।
  • फंड का सही उपयोग नहीं होता।

🔴 4. फंड का गलत आवंटन

  • पैसा बीच में ही “गायब” हो जाता है।
  • CAG (भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) की रिपोर्ट में हर साल घोटाले उजागर होते हैं।

🔴 5. जनता की जागरूकता की कमी

  • लोग शिकायत नहीं करते, या फिर हार मान लेते हैं

3. जवाबदेही कैसे तय करें? (RTI, CAG, मीडिया)

📌 RTI (सूचना का अधिकार) का उपयोग

  • RTI डालकर पूछें:
    • “मेरे इलाके की सड़क मरम्मत पर कितना पैसा खर्च हुआ?”
    • “अस्पताल में मशीनें क्यों नहीं आईं?”
    • RTI कैसे डालें? यहाँ पढ़ें

📌 CAG रिपोर्ट्स पढ़ें

  • CAG (https://cag.gov.in) हर साल सरकारी खर्चों की जांच करता है।
  • घोटालों को उजागर करता है (जैसे 2022 में PMGSY में ₹1,300 करोड़ का गबन पकड़ा गया)।

📌 मीडिया और सोशल मीडिया का दबाव

  • ट्विटर पर #हमारे_टैक्स_का_पैसा_कहाँ_गया? ट्रेंड कराएँ।
  • लोकल न्यूज़ चैनल्स को शिकायत भेजें।

4. जनता क्या कर सकती है? (Action Plan)

✅ 1. RTI डालें

  • सरकारी योजनाओं का हिसाब मांगें

✅ 2. शिकायत दर्ज करें

  • CPGRAMS (https://pgportal.gov.in) पर ऑनलाइन कम्प्लेंट करें।
  • नगर निगम/जिला अधिकारी को लिखित शिकायत दें।

✅ 3. सामूहिक आवाज़ उठाएँ

  • 10-15 लोग मिलकर विधायक/सांसद से मिलें।
  • प्रदर्शन/धरना दें (शांतिपूर्ण तरीके से)।

✅ 4. वोट का सही इस्तेमाल करें

  • अगले चुनाव में सवाल पूछें: “आपने हमारे इलाके के लिए क्या किया?”
  • जवाब न मिले तो वोट न दें!

निष्कर्ष: “हम बदलाव ला सकते हैं!”

सरकारी पैसा हमारे टैक्स का पैसा है। अगर हम चुप रहेंगे, तो भ्रष्टाचार और लापरवाही बढ़ती रहेगी। RTI, शिकायत, मीडिया और वोट के जरिए हम जवाबदेही मांग सकते हैं

“अगर हम नहीं बोलेंगे, तो कोई नहीं सुनेगा!”

क्या आपके इलाके में भी ऐसी समस्याएँ हैं? कमेंट में बताएँ और इस आर्टिकल को शेयर करके जागरूकता फैलाएँ!

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