रॉबर्ट्सगंज की जमीनी हकीकत: सोनभद्र का दर्द और जनता की चुप्पी

भूमिका: एक उपेक्षित शहर की कहानी

रॉबर्ट्सगंज, सोनभद्र जिले का मुख्यालय होने के बावजूद आज भी बुनियादी सुविधाओं के संकट से जूझ रहा है। यहाँ की सड़कें टूटी हैं, नालियाँ गंदगी से भरी हैं, बिजली-पानी की सप्लाई अराजक है, और प्रशासनिक लापरवाही ने जनता को हताश कर दिया है। चुनाव के वक्त तो नेता यहाँ जरूर आते हैं, लेकिन वादे पूरे होते नहीं दिखते।

यह लेख रॉबर्ट्सगंज की जमीनी हकीकत को उजागर करता है और बताता है कि कैसे जनता अपनी आवाज़ उठाकर बदलाव ला सकती है।


1. गंदगी का साम्राज्य: नालियाँ और कूड़े के ढेर

  • नालियाँ सड़कों पर उबल रही हैं, जिससे बदबू और मच्छरों का प्रकोप बढ़ता है।
  • कचरा प्रबंधन नाममात्र का है – नगर पंचायत की लापरवाही साफ दिखती है।
  • मॉनसून में हालात और बिगड़ते हैं, जब गंदा पानी घरों में घुस जाता है।

“यहाँ तो सफाई कर्मचारी भी महीने में एक बार आएँ तो बड़ी बात है!” – एक स्थानीय निवासी


2. टूटी सड़कें और गड्ढों का खेल

  • रॉबर्ट्सगंज की अधिकतर सड़कें गड्ढों से भरी हैं, जिससे दुर्घटनाएँ आम हैं।
  • बारिश के बाद तो सड़कें नदी जैसी लगती हैं, जिसमें गाड़ियाँ फँस जाती हैं।
  • नगर पंचायत द्वारा मरम्मत का ढोंग – कुछ दिनों बाद फिर वही हालत।

समाधान?

  • नगर पंचायत को लिखित शिकायत दें और RTI डालकर पूछें कि सड़क मरम्मत का बजट कहाँ गया?

3. बिजली-पानी का खेल: एक आपसी तालमेल की कमी

🔴 पानी आए तो बिजली नहीं, बिजली आए तो पानी नहीं!

  • जल विभाग और बिजली विभाग के बीच तालमेल की भारी कमी
  • पानी सप्लाई के समय अक्सर बिजली कट जाती है, जिससे टंकियाँ नहीं भर पातीं।
  • रात को बिजली आती है, लेकिन पानी नहीं होता, जिससे लोगों को पानी इकट्ठा करने में दिक्कत होती है।

क्या करें?

  • जिला अधिकारी (DM) को सामूहिक शिकायत भेजें।
  • #NoWaterNoVote जैसे हैशटैग का उपयोग कर सोशल मीडिया पर दबाव बनाएँ।

4. बरसात में जलभराव: धर्मशाला चौक जैसे इलाके तबाह

  • धर्मशाला चौक, बस स्टेशन के आसपास और कई अन्य इलाके बारिश में पानी से भर जाते हैं
  • नालियों की सफाई न होने से जलभराव की समस्या गंभीर हो जाती है।
  • पानी भरने से दुकानें और घर डूब जाते हैं, जिससे लोगों को भारी नुकसान होता है।

समाधान:

  • नगर पंचायत को मजबूर करें कि वह मॉनसून से पहले नालियों की सफाई करे।
  • मीडिया को सूचित करें – स्थानीय अखबारों और न्यूज़ चैनल्स को इस मुद्दे पर रिपोर्टिंग के लिए प्रेरित करें।

5. नेताओं की गायब होती मौजूदगी और जनता की चुप्पी

  • चुनाव के समय तो नेता गली-गली घूमते हैं, लेकिन बाद में कोई पूछने वाला नहीं रहता
  • जनता भी शिकायत करने से हिचकती है, जिससे प्रशासन और नेताओं को लापरवाही करने का मौका मिलता है।

क्या करें?

  • जागरूक नागरिक बनें – शिकायत दर्ज करें, RTI डालें, सोशल मीडिया पर आवाज़ उठाएँ।
  • अगले चुनाव में सवाल पूछें – नेताओं से पूछें कि उन्होंने रॉबर्ट्सगंज के लिए क्या किया?

6. नगर पंचायत और प्रशासन की लापरवाही

  • शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं – नगर पंचायत के अधिकारी जवाबदेही से बचते हैं।
  • फंड का दुरुपयोग – सड़कों, नालियों और पानी की व्यवस्था पर पैसा खर्च होने के बावजूद हालात नहीं सुधरते।

समाधान:

  • RTI डालकर पूछें – नगर पंचायत ने कितना पैसा खर्च किया और कहाँ?
  • जिला अधिकारी (DM) को रिपोर्ट करें – यदि स्थानीय अधिकारी काम नहीं करते, तो उच्च स्तर पर शिकायत करें।

7. बदलाव की उम्मीद: जनता को जागना होगा!

रॉबर्ट्सगंज की समस्याएँ तभी दूर होंगी जब जनता अपनी आवाज़ बुलंद करेगी

क्या कर सकते हैं?

✅ शिकायत दर्ज करें – नगर पंचायत, जिला प्रशासन और ऑनलाइन पोर्टल्स पर।
✅ RTI का उपयोग करें – सरकारी फंड का हिसाब मांगें।
✅ सोशल मीडिया पर ट्रेंड बनाएँ – #RobertsganjCrisis #SaveRobertsganj जैसे हैशटैग का उपयोग करें।
✅ चुनाव में सही प्रतिनिधि चुनें – जो वादे पूरे करे।

“जब तक जनता चुप रहेगी, तब तक प्रशासन सोता रहेगा!”


निष्कर्ष: अब बदलाव का वक्त आ गया है!

रॉबर्ट्सगंज की समस्याएँ सिर्फ एक शहर की नहीं, बल्कि पूरे सोनभद्र जिले की हैं। अगर जनता एकजुट होकर आवाज़ उठाएगी, तो निश्चित ही बदलाव आएगा।

क्या आप रॉबर्ट्सगंज की इन समस्याओं से परेशान हैं? इस लेख को शेयर करें और #SaveRobertsganj ट्रेंड कराएँ!

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